यात्रा के दृष्टि कोण:
श्री कृष्ण संदेश यात्रा केवल एक यात्रा नहीं है; यह धर्मजागरण का महाअभियान, राष्ट्रचेतना का उद्घोष, संस्कृति संरक्षण का संकल्प तथा आत्मजागरण की दिव्य साधना है।
यह यात्रा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से निकलकर जन-जन के हृदय तक पहुँचने वाली आध्यात्मिक चेतना की पावन धारा है। इसका उद्देश्य केवल मंदिरों का दर्शन कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक हृदय को श्रीकृष्णमय बनाना है।
जब-जब समाज अपने मूल्यों से दूर हुआ है, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण का संदेश मानवता के लिए प्रकाशस्तम्भ बना है। आज भी समाज को सत्य, धर्म, करुणा, सेवा, त्याग, सदाचार, सामाजिक समरसता एवं आध्यात्मिक जागरण की आवश्यकता है। यह यात्रा उसी दिव्य संदेश को पुनः जनमानस में प्रतिष्ठित करने का प्रयास है।
यह यात्रा श्रद्धा से सेवा तक, भक्ति से शक्ति तक, व्यक्ति से समाज तक तथा समाज से राष्ट्र तक एक सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला है।
हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य कला है।
अतः इस यात्रा का दृष्टिकोण निम्नलिखित आदर्शों पर आधारित है:
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा प्रतिपादित धर्म, कर्तव्य, सत्य एवं न्याय के सिद्धांतों को पुनः समाज में प्रतिष्ठित करना।
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, भक्ति एवं आत्मिक सम्बंध को विकसित करना।
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग एवं राजयोग को जन-जन तक पहुँचाना।
भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना और सनातन जीवन मूल्यों को पुनर्जीवित करना।
प्रत्येक श्रद्धालु को आत्मबोध, आत्मानुशासन एवं ईश्वरानुभूति की दिशा में प्रेरित करना।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा एवं भक्ति के दिव्य संदेश को प्रत्येक परिवार और प्रत्येक हृदय तक पहुँचाना।
गीता को केवल ग्रन्थ न मानकर जीवन का संविधान बनाने हेतु समाज को प्रेरित करना।
प्राचीन मंदिरों, तीर्थों, आश्रमों, धार्मिक परम्पराओं एवं सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा एवं संवर्धन हेतु जनभागीदारी विकसित करना।
भारत की आध्यात्मिक पहचान एवं सांस्कृतिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुँचाना।
युवाओं को श्रीकृष्ण के चरित्र से नेतृत्व, साहस, कर्तव्य, नीति एवं राष्ट्रसेवा की प्रेरणा प्रदान करना।
समस्त समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र एवं वर्ग से ऊपर उठाकर "सनातन परिवार" की भावना में जोड़ना।
गौमाता, गीता एवं गंगा आधारित सनातन जीवन मूल्यों के संरक्षण के प्रति समाज को जागृत करना।
अन्नदान, वस्त्रदान, चिकित्सासेवा, शिक्षासेवा एवं मानवसेवा को ईश्वरसेवा का स्वरूप मानकर जनभागीदारी बढ़ाना।
वृक्षारोपण, जलसंरक्षण एवं स्वच्छता के माध्यम से प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप मानकर उसकी सेवा करना।
नामजप, ध्यान, साधना, सत्संग, स्वाध्याय एवं संयमित जीवन के प्रति लोगों को प्रेरित करना।
✓ प्रत्येक ग्राम, नगर एवं परिवार तक श्रीकृष्ण का संदेश पहुँचाएँगे।
✓ प्रत्येक हृदय में भक्ति का दीप प्रज्ज्वलित करेंगे।
✓ धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्रति गौरव भाव जागृत करेंगे।
✓ युवाओं को सनातन मूल्यों से जोड़ेंगे।
✓ भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण करेंगे।
✓ श्रीमद्भगवद्गीता को जीवन व्यवहार का आधार बनाएँगे।
✓ सेवा, संस्कार और समरसता का विस्तार करेंगे।
✓ "धर्मो रक्षति रक्षितः" के सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाएँगे।
श्रीकृष्ण केवल मंदिरों में विराजमान देवता नहीं हैं।
वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रकाश, प्रेरणा और परम सत्य के स्रोत हैं।
उनकी वंशी प्रेम का संदेश देती है।
उनका सुदर्शन धर्मरक्षा का संदेश देता है।
उनकी गीता कर्तव्य का संदेश देती है।
उनकी लीलाएँ भक्ति का संदेश देती हैं।
और उनका सम्पूर्ण जीवन मानवता को दिव्यता की ओर ले जाने का संदेश देता है।