Our Mission

Our Mission

कृष्ण केंद्रित मिशन:

कृष्ण-केंद्रित दिव्य मिशन

"मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु"

(श्रीमद्भगवद्गीता 18.65)

श्री कृष्ण संदेश यात्रा का परम उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, अपितु भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेश, श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान, सनातन संस्कृति के मूल्यों तथा धर्ममय जीवन-पद्धति को जन-जन तक पहुँचाना है। यह यात्रा मानव जीवन को आत्मोन्नति, राष्ट्रोत्थान, धर्मपालन तथा लोककल्याण की दिशा में अग्रसर करने का एक आध्यात्मिक अभियान है।


मंगलाचरण

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
(श्रीमद्भगवद्गीता 4.8)


यात्रा का दिव्य उद्देश्य

१. श्रीकृष्ण भक्ति का संवर्धन

भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में अनन्य भक्ति को मोक्ष का सर्वोच्च साधन बताया है।

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥
(गीता 9.22)

इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य जनमानस में श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, समर्पण, प्रेम और निष्काम भक्ति की भावना को जागृत करना है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति भगवान के साथ अपने सनातन सम्बन्ध का अनुभव कर सके।


२. श्रीकृष्ण जीवन-दर्शन का प्रचार

भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन धर्म, नीति, साहस, करुणा और लोकमंगल का आदर्श है।

गोकुल की बाललीलाओं से लेकर कुरुक्षेत्र में धर्मस्थापना तक उनका सम्पूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि धर्म की विजय के लिए संख्या नहीं, सत्य और संकल्प आवश्यक हैं।

यतो धर्मस्ततो कृष्णो यतः कृष्णस्ततो जयः।

यात्रा के माध्यम से समाज को श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन और आदर्श चरित्र से परिचित कराया जाएगा।


३. गीता ज्ञान का जन-जागरण

श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रन्थ नहीं बल्कि मानव जीवन का दिव्य मार्गदर्शन है।

 

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2.47)

 

यात्रा द्वारा कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग तथा आत्मानुशासन के सिद्धांतों का व्यापक प्रचार किया जाएगा।


४. कृष्ण साधना में जागृति

साधना, नामजप, ध्यान, कीर्तन, सत्संग एवं स्वाध्याय के माध्यम से भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के निकट लाना इस यात्रा का पवित्र लक्ष्य है।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥

नियमित साधना से मनुष्य चित्त की शुद्धि एवं आत्मिक शान्ति प्राप्त करता है।


५. आत्मिक विकास एवं आत्मबोध

सनातन शास्त्रों के अनुसार मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य आत्मसाक्षात्कार और परमात्मा की प्राप्ति है।

न जायते म्रियते वा कदाचित्। (गीता 2.20)

यात्रा के माध्यम से व्यक्ति अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझकर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर होगा।


६. ब्रह्मज्ञान एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रसार

अर्जुन को प्राप्त दिव्य ज्ञान आज भी समस्त मानव जाति के लिए उतना ही प्रासंगिक है।

विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥
(गीता 5.18)

यह यात्रा समाज में ब्रह्मज्ञान, समदृष्टि और आध्यात्मिक जागृति का प्रसार करेगी।


७. सांस्कृतिक जागरण एवं सनातन गौरव

भारतीय संस्कृति केवल परम्पराओं का समूह नहीं, बल्कि जीवन को परम सत्य की ओर ले जाने वाली दिव्य चेतना है।

इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय सभ्यता, संस्कृति, शास्त्र, मंदिर परम्परा, तीर्थ संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत के प्रति गौरवबोध उत्पन्न करना है।

धर्मो रक्षति रक्षितः।


८. सेवा को साधना बनाना

भगवान श्रीकृष्ण ने लोकसंग्रह और लोककल्याण की भावना का उपदेश दिया है।

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। (गीता 3.21)

यात्रा के माध्यम से सेवा, परोपकार, स्वच्छता, अन्नदान, गौसेवा तथा समाज उत्थान के कार्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


९. युवाशक्ति का धर्मोन्मुख मार्गदर्शन

आज का युवा यदि श्रीकृष्ण के आदर्शों को आत्मसात कर ले तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

यात्रा द्वारा युवाओं को संयम, चरित्र-निर्माण, आत्मविश्वास, नेतृत्व, राष्ट्रसेवा एवं आध्यात्मिक जीवन के लिए प्रेरित किया जाएगा।

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। (गीता 6.5)


१०. सांस्कृतिक साक्षरता एवं ज्ञान-वितरण

भगवान श्रीकृष्ण की कथाएँ केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन-निर्माण के महान सिद्धांत हैं।

यात्रा द्वारा कथा, प्रवचन, डिजिटल माध्यम, साहित्य, संगीत एवं कला के माध्यम से कृष्ण संदेश का व्यापक प्रसार किया जाएगा।


११. डिजिटल कृष्ण चेतना अभियान

आधुनिक युग में डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर श्रीमद्भगवद्गीता, कृष्ण कथाओं, भक्ति संगीत, संस्कार शिक्षा तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन को विश्वभर में पहुँचाना इस मिशन का महत्वपूर्ण भाग होगा।


१२. कृष्ण साधना एवं संस्कार केन्द्रों की स्थापना

देशभर में ऐसे केन्द्र स्थापित किए जाएंगे जहाँ:

  • गीता अध्ययन
  • नामस्मरण
  • सत्संग
  • संस्कार शिक्षा
  • गौसेवा
  • युवा प्रशिक्षण
  • आध्यात्मिक परामर्श

जैसे कार्यक्रम संचालित हों।


हमारा संकल्प

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
(श्रीमद्भगवद्गीता 18.66)

हम संकल्प लेते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेश, गीता के अमृत ज्ञान, सनातन संस्कृति की गौरवशाली परम्पराओं तथा धर्म, सेवा और साधना के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएंगे। हम ऐसा समाज निर्मित करने का प्रयास करेंगे जो आध्यात्मिक रूप से जागृत, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, नैतिक रूप से दृढ़ तथा राष्ट्र के प्रति समर्पित हो।


महामंत्र

"घर-घर कृष्ण, जन-जन गीता"

"धर्म, संस्कार और राष्ट्र वैभव"

"भक्ति से शक्ति, शक्ति से संस्कृति, संस्कृति से राष्ट्र जागरण"