आपने अनेक बार श्री कृष्ण संदेश यात्रा के स्वयंसेवकों को सड़कों पर हरिनाम संकीर्तन करते, भजन गाते, नृत्य करते, आध्यात्मिक साहित्य का वितरण करते अथवा जनसामान्य को भगवान श्रीकृष्ण का संदेश सुनाते हुए देखा होगा। आपके मन में यह प्रश्न भी आया होगा कि वे कौन हैं, उनका उद्देश्य क्या है, और वे भगवान श्रीकृष्ण का संदेश क्यों लेकर चल रहे हैं?
श्री कृष्ण संदेश यात्रा एक धार्मिक संगठन मात्र नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेश, श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान तथा सनातन जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अभियान है।
नहीं।
श्री कृष्ण संदेश यात्रा का उद्देश्य किसी व्यक्ति की बाहरी पहचान बदलना नहीं है। न तो वस्त्र बदलना आवश्यक है, न केश-विन्यास और न ही अपनी पारिवारिक या सामाजिक जिम्मेदारियाँ छोड़ना।
भगवान श्रीकृष्ण का संदेश प्रत्येक मानव के लिए है। यह किसी जाति, वर्ग, भाषा, प्रदेश या समुदाय तक सीमित नहीं है।
"विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥"(श्रीमद्भगवद्गीता 5.18)
सच्चा आध्यात्मिक जीवन बाहरी परिवर्तन से नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि और चेतना के जागरण से प्रारम्भ होता है।
हम मानते हैं कि प्रत्येक जीव भगवान का अंश है।
"ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।"(श्रीमद्भगवद्गीता 15.7)
इसलिए समस्त मानवता एक आध्यात्मिक परिवार है। प्रेम, सेवा, करुणा, समरसता और ईश्वर से सम्बन्ध ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।
श्री कृष्ण संदेश यात्रा लोगों को उनके सनातन स्वरूप का बोध कराती है और यह बताती है कि वास्तविक सुख भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ आत्मिक सम्बन्ध स्थापित करने में है।
सनातन शास्त्रों में कलियुग के लिए भगवान के नाम-स्मरण को सर्वोत्तम साधना बताया गया है।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥
भगवान के नाम का कीर्तन मन को पवित्र करता है, तनाव को कम करता है, आत्मिक शांति प्रदान करता है तथा व्यक्ति के भीतर सुप्त दिव्यता को जागृत करता है।
इसलिए हमारी यात्रा में संकीर्तन, भजन, कथा, सत्संग और सामूहिक प्रार्थना प्रमुख साधन हैं।
सनातन शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण पुरुषोत्तम परमात्मा हैं।
"अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते।"(श्रीमद्भगवद्गीता 10.8)
वे केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि प्रेम, ज्ञान, शक्ति, करुणा और धर्म के परम स्रोत हैं। उनका जीवन मानवता को यह सिखाता है कि प्रेमपूर्वक जीवन कैसे जिया जाए, धर्म की रक्षा कैसे की जाए और संकटों में भी सत्य का मार्ग कैसे चुना जाए।